सब्सटेंटिव मोशन से बीजेपी का बड़ा दांव,
1978 की मिसाल से बढ़ी हलचल

न्यूज़ बॉक्स संवाददाता
नयी दिल्ली :लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आक्रामक भाषण के बाद बीजेपी ने उन्हें घेरने की रणनीति तेज कर दी है। बजट सत्र के अगले चरण में भाजपा संसदीय नियमों के तहत राहुल गांधी को निशाने पर ले सकती है। साथ ही पार्टी संसद से लेकर सड़क तक विरोध का प्लान बना चुकी है। सवाल यह है—क्या वाकई राहुल गांधी की सदस्यता खतरे में है?

कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे हमले कर रहे हैं। बजट सत्र का पहला चरण हंगामे में बीतने के बाद अब भाजपा ने संसदीय परंपराओं और नियमों के तहत पलटवार की तैयारी कर ली है। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लोकसभा में लाया गया सब्सटेंटिव मोशन अब सियासी केंद्र बन गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह प्रस्ताव विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव से अधिक प्रभावी माना जा रहा है और अगर इस पर चर्चा होती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बीजेपी लोकसभा अध्यक्ष से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर चर्चा कराने का अनुरोध कर सकती है।

अगर निशिकांत दुबे के प्रस्ताव पर सदन में बहस होती है, तो राहुल गांधी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसी वजह से बीजेपी ने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव की बजाय निजी सदस्य द्वारा लाए गए इस सब्सटेंटिव मोशन के पीछे मजबूती से खड़े होने का फैसला किया है। भाजपा की रणनीति दो स्तरों पर है— पहला, संसद के नियमों के तहत राहुल गांधी को घेरना और प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश करना।दूसरा, देशभर में राहुल गांधी के भाषणों के खिलाफ अभियान चलाना। पार्टी ने केंद्रीय मंत्रियों और प्रदेश अध्यक्षों को टॉकिंग पॉइंट्स जारी किए हैं। राज्यों में प्रेस कॉन्फ्रेंस, विज्ञापन और नुक्कड़ सभाओं के जरिए राहुल गांधी के बयानों का जवाब देने की तैयारी है।

इस पूरे विवाद के बीच निशिकांत दुबे ने 1978 का उदाहरण देकर राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दिसंबर 1978 की संसदीय कार्यवाही का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र किया। दुबे के अनुसार, 1978 में एक प्रस्ताव के आधार पर इंदिरा गांधी को विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का दोषी ठहराया गया था। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के कार्यकाल में प्रस्ताव पारित हुआ, जिसके बाद इंदिरा गांधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। दुबे ने लोकसभा की कार्यप्रणाली के नियम 352(5) और 353 के तहत अपने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति मांगी है और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
हालांकि, किसी भी सब्सटेंटिव मोशन पर अंतिम निर्णय सदन की प्रक्रिया और बहुमत पर निर्भर करता है। बीजेपी इस लड़ाई को सीधे मोदी बनाम राहुल नहीं बनाना चाहती, बल्कि इसे संसदीय प्रक्रिया के दायरे में रखना चाहती है। अब नजरें बजट सत्र के अगले चरण पर टिकी हैं—जहां तय होगा कि यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या संसदीय कार्रवाई का रूप लेगा। सियासत गरम है, और आने वाले दिन संसद के भीतर बड़ी टकराव की पटकथा लिख सकते हैं।