बाजार से जुटेंगे 4 लाख करोड़
सरकार का बड़ा शहरी दांव

न्यूज़ बॉक्स संवाददाता
नयी दिल्ली :प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता (CA) के साथ अर्बन चैलेंज फंड (UCF) को मंजूरी दे दी है। शर्त यह है कि किसी भी परियोजना की कम-से-कम 50% लागत बाजार से—नगर निगम बॉन्ड, बैंक ऋण और पीपीपी—के जरिए जुटानी होगी, जबकि केंद्र 25% तक सहायता देगा। इससे अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में करीब 4 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।
कब तक लागू रहेगा?-क्या बदलेगा?
यह फंड वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगा, जिसे 2033-34 तक बढ़ाया जा सकेगा। यह बजट 2025-26 में घोषित ‘ग्रोथ हब शहर’, ‘रचनात्मक पुनर्विकास’ और ‘जल व स्वच्छता’ एजेंडा को लागू करेगा।
सरकार का कहना है कि यह पहल अनुदान-आधारित मॉडल से हटकर बाजार-आधारित, सुधार-प्रेरित और परिणाम-केंद्रित शहरी विकास की ओर बड़ा बदलाव है। निजी भागीदारी, जोखिम-साझेदारी ढांचा और सेवा मानकों की बेंचमार्किंग पर जोर रहेगा।
फंड की प्रमुख विशेषताएं
• परियोजनाओं का चयन पारदर्शी चैलेंज मोड से—उच्च प्रभाव और सुधार-उन्मुख प्रस्तावों को प्राथमिकता।
• शहरी शासन, वित्तीय सुधार, परिचालन दक्षता और शहरी नियोजन पर कड़ा फोकस।
• 5,000 करोड़ रुपये का समर्पित कोष—4223 शहरों (टियर-2/टियर-3 सहित) की क्रेडिट-योग्यता बढ़ाने के लिए।
• शहरी निकायों (ULBs) को बैंक योग्य एसेट क्लास के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य।
छोटे शहरों के लिए क्रेडिट गारंटी
पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के सभी शहरों तथा अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 1 लाख से कम आबादी वाले शहरी निकायों के लिए 5,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट रीपेमेंट गारंटी योजना स्वीकृत। पहली बार के ऋण पर 7 करोड़ रुपये या ऋण राशि का 70% (जो कम हो) तक केंद्रीय गारंटी; सफल पुनर्भुगतान पर अगली परियोजना के लिए 7 करोड़ या 50% (जो कम हो) तक गारंटी। इससे छोटे शहरों में न्यूनतम 20 करोड़ (पहली बार) और 28 करोड़ (आगामी) की परियोजनाओं को बल मिलेगा।
परियोजना वर्टिकल
- शहर बतौर ग्रोथ हब—आर्थिक नोड, ट्रांजिट-आधारित विकास, हरित/अर्ध-हरित विकास, शहरी गतिशीलता और प्रतिस्पर्धी अवसंरचना।
- रचनात्मक पुनर्विकास—सीबीडी/विरासत क्षेत्र नवीनीकरण, ब्राउनफील्ड पुनर्जीवन, जलवायु-लचीलापन और भीड़-घटाने के उपाय।
- जल व स्वच्छता—पेयजल, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता पर फोकस।
किन शहरों को कवर?
• 10 लाख या अधिक आबादी वाले सभी शहर (2025 अनुमान),
• उपरोक्त में शामिल न होने वाली सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेश राजधानियां,
• 1 लाख या अधिक आबादी वाले प्रमुख औद्योगिक शहर। साथ ही, छोटे/पहाड़ी/पूर्वोत्तर शहरों को क्रेडिट गारंटी के तहत समर्थन।
परिणाम-केंद्रित ढांचा
फंडिंग को शासन, डिजिटल और वित्तीय सुधारों, सेवा दक्षता, ट्रांजिट-ओरिएंटेड प्लानिंग, हरित अवसंरचना और परियोजना-विशिष्ट केपीआई से जोड़ा जाएगा। सुधारों की निरंतरता अगली किश्त की शर्त होगी, और निगरानी एकल डिजिटल पोर्टल के जरिए कागजरहित होगी।
सरकार का दावा है कि अर्बन चैलेंज फंड निजी निवेश को बड़े पैमाने पर आकर्षित करेगा, शहरी शासन को मजबूत करेगा और भविष्य-तैयार, जलवायु-संवेदनशील शहरों के निर्माण को गति देगा।