सरकारी वकील अदालत के सवालों के जवाब नहीं दे सके

न्यूज़ बॉक्स संवाददाता
कोलकाता: कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक कस्टम अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआइआर खारिज कर दी है। पिछली सुनवाई में जस्टिस शुभ्रा घोष ने कस्टम अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआइआर पर सवाल उठाए थे। मामले की सुनवाई के दौरान जज ने पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच पर उठाये प्रश्न। जज ने कहा बिना प्रारंभिक जांच के कैसे FIR दर्ज कर ली गई। इसके बाद, जस्टिस शुभ्रा घोष ने कस्टम अधिकारी के खिलाफ दर्ज FIR खारिज करने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में एक कस्टम अधिकारी का ऑटो चालकों के साथ कार दुर्घटना को लेकर झगड़ा हुआ था। हालांकि, तीखी बहस के बाद मामला सुलझ गया। अधिकारी अपने घर चले गए। कथित तौर पर इस घटना के बाद, 50-60 उपद्रवी कस्टम अधिकारी के आवास के बाहर जमा हो गए। उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया और आवास में घुस गए। उन्होंने भयंकर तोड़फोड़ की।
बताया जा रहा कि कस्टम अधिकारी की बुरी तरह पिटाई की गई। उनका सिर फोड़ दिया गया। आरोप है कि अधिकारी की पत्नी के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। कस्टम अधिकारी को गंभीर रूप से घायल अवस्था में कल्याणी एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि इस घटना में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें जमानत मिल गई। इसे लेकर पुलिस को सवालों का सामना करना पड़ा।
उक्त घटना के विरोध में कस्टम अधिकारी के खिलाफ उल्टे आरोपितों ने छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। अधिकारी ने इसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले इस मामले की सुनवाई में न्यायाधीश ने कहा था कि पुलिस ने सीमा शुल्क अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करते समय किसी भी कानून का पालन नहीं किया।
अदालत ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों की याद दिलाते हुए जज ने सरकारी वकील से पूछा कि क्या आपने शिकायत मिलने के तुरंत बाद प्राथमिकी दर्ज की थी? क्या आपने सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रारंभिक जांच की थी? जज ने यह भी पूछा कि क्या सीमा शुल्क अधिकारी को धारा 35(3) के तहत नोटिस भेजा गया था। सरकारी वकील एक भी सवाल का जवाब नहीं दे सके। शुक्रवार को मामले की फिर से सुनवाई हुई। सुनवाई में न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने सीमा शुल्क अधिकारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने का आदेश दिया।