बांग्लादेश सुधार गृह में पश्चिम बंगाल के मूक-बधिर मछुआरे की मौत

परिवार ने लगाया यातना का आरोप
न्यूज़ बॉक्स संवाददाता

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के एक मूक-बधिर मछुआरे की बांग्लादेश के एक सुधार गृह में मौत हो गई। मृतक की पहचान बबलू दास के रूप में हुई है, जो दक्षिण 24 परगना के हारवुड पॉइंट तटीय पुलिस थाने के अंतर्गत पश्चिम गंगाधरपुर गाँव का निवासी था।

परिवार ने दावा किया कि परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य बबलू मूक-बधिर होने के बावजूद मेहनती था। बबलू के छोटे भाई बासुदेव ने आरोप लगाया कि जेल के अंदर उसे प्रताड़ित करके मार डाला गया। जब उसे कोई मामूली शारीरिक बीमारी भी नहीं थी, तो वह सामान्य रूप से कैसे मर सकता है ?

जानकारी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के तटीय क्षेत्र काकद्वीप के बबलू दास और 33 अन्य मछुआरों को लगभग चार महीने पहले बांग्लादेशी नौसेना ने पड़ोसी देश के जलक्षेत्र में कथित तौर पर प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। वे जुलाई में एक ट्रॉलर ‘एफबी मंगलचंदी’ से मछली पकड़ने गए थे और बबलू समेत उनमें से कुछ लोग ‘गलती से’ जल सीमा पार कर गए थे।
मृतकों के परिवार के अनुसार, उन्हें बांग्लादेशी नौसेना ने गिरफ्तार कर लिया था और तब से वे बांग्लादेशी जेल में बंद हैं। ज़िले के सुंदरबन मछुआरा संघ के अध्यक्ष सतीनाथ पात्रा के मुताबिक शव को जल्द ही बांग्लादेश से वापस लाने के प्रयास जारी हैं।
लगभग एक साल पहले, छह मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर सवार कुल 95 अन्य भारतीय मछुआरों और चालक दल के सदस्यों को बांग्लादेश सरकार ने तब हिरासत में ले लिया था जब वे “गलती से” पड़ोसी देश के जलक्षेत्र में चले गए थे। इससे पहले जनवरी में, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश सरकार द्वारा रिहा किए गए कुछ मछुआरों को बांग्लादेश की जेल में पीटा गया था। ममता ने बांग्लादेश के जलक्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए मछुआरों को “परिस्थितियों का शिकार” बताया था।

जनवरी में सागर द्वीप की अपनी यात्रा के दौरान ममता ने कहा था, “मैंने देखा कि उनमें से कुछ लंगड़ा रहे थे। पूछने पर, मछुआरों ने मुझे बताया कि जेल में उनके हाथ बाँधकर उन पर हमला किया गया था। नतीजतन, उनकी कमर और पैरों के नीचे चोटें आई हैं… वे मुझसे बात करते हुए रो रहे थे।” ममता बनर्जी ने जीवन की नई शुरुआत करने के लिए सहायता के प्रतीक के रूप में उनमें से प्रत्येक को 10,000 रुपये के चेक दिए थे।
गौरतलब है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए पानी में कूदने से मरने वाले एक अन्य मछुआरे के परिवार को 2 लाख रुपये का चेक दिया गया था । इनमें से ज़्यादातर मछुआरे, जो काकद्वीप और नामखाना के थे जिन्हे बांग्लादेश सरकार ने रिहा करदिया था । भारतीय तटरक्षक बल ने मछुआरों को दक्षिण 24 परगना के ज़िला मजिस्ट्रेट को सौंप दिया। बंगाल की मुख्यमंत्री ने मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा दोबारा पार न करने की चेतावनी दी थी।
उन्होंने एक साल पहले की उस घटना का ज़िक्र किया जब एक बांग्लादेशी ट्रॉलर गलती से सीमा पार करके भारतीय क्षेत्र में आ गया था। उनकी सरकार ने हाल ही में रिहा होने तक उनके साथ अच्छा व्यवहार किया। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने भी रविवार को 90 बांग्लादेशी मछुआरों को उनके देश के अधिकारियों को सौंप दिया। उन्होंने कहा, “हमने उनकी मदद की ताकि हमारे देश और राज्य की बदनामी न हो। हम भारत सरकार के साथ लगातार संपर्क में थे। मैं चाहती हूँ कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध बने रहें।” उन्होंने कहा कि दूसरे देश के जलक्षेत्र में प्रवेश ज़्यादातर तूफ़ानों के दौरान होता है।

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